राधारानी बुला लो हमे भी

राधारानी बुला लो हमे भी

राधारानी बुला लो हमे भी
द्वारे आने के काबिल नही है
हम गुनागहार है माफ कर दो
सिर झुकाने के काबिल नही है
राधारानी बुला लो हमे भी….

गम ने मारा है गम ने सताया
गम ने हमको परेशान किया है
गम मे हम इस कदर दब चुके है
सिर उठाने के काबिल नही है
राधारानी बुला लो हमे भी….

गर्दिशो में हम ऐसे फसे है
जैसे बादल मे चन्दा छिपा है
जुल्म वो ढहा रहा है जमाना
जो बयाने के काबिल नही है
राधारानी बुला लो हमे भी….

हमको परवाह नही है जमाना
रूठता है तो रुठे खुशी से
इल्तजा है ना तुम रूठ जाना
हम मनाने के काबिल नही है
राधारानी बुला लो हमे भी….

खुशलब आँखे पत्थरा गई है
धड़कनो का भरोसा नही है
जिन्दगी मौत से लड़ रही है
लब हिलाने के काबिल नही है
राधारानी बुला लो हमे भी….

दिल में आ जाओ मेहमान बनकर
मुम्तजर है मुरारे सवर कर
दर्द दिल का बढ़ा जा रहा है
जो दबाने के काबिल नही है
राधारानी बुला लो हमे भी….

राधारानी बुला लो हमे भी
द्वारे आने के काबिल नही है
हम गुनागहार है माफ कर दो
सिर झुकाने ले काबिल नही है

यह गीत “राधारानी बुला लो हमे भी” एक गहरी आत्मा की आवाज़ है, जो राधा के दर्शन के प्रति अपनी अधूरी इच्छाओं और असमर्थताओं को व्यक्त करता है।

पहले चारण में, गायक अपने अधूरे स्वीकृति के लिए राधा को बुलाते हैं, वे अपने आप को अनुकरण के लिए अक्षम महसूस करते हैं। “द्वारे आने के काबिल नही है” और “सिर झुकाने के काबिल नही है” के शब्द उनकी समर्पण और असमर्थता को दर्शाते हैं।

गायक दूसरे चारण में, अपने गहरे दुःख को व्यक्त करते हैं, जो उन्हें असमर्थ और अधीन बना देता है। “गम ने मारा है गम ने सताया” और “गम मे हम इस कदर दब चुके है” की श्रृंखला उनकी अवस्था को अभिव्यक्त करती है, जो उन्हें उदासी और निराशा में डूबने के लिए मजबूर करती है।

तीसरे चारण में, गायक समाज की निर्धारित अपेक्षाओं को नजरअंदाज़ करते हैं, और केवल राधा की स्वीकृति की तलाश में हैं। “हमको परवाह नही है जमाना” के शब्द इस विचार को उजागर करते हैं कि उन्हें केवल राधा की गोदी में सुख और सांत्वना की खोज है, चाहे वह दुनियावी नामुमकिन स्थितियों का भुगतान करना पड़े।

चौथे चारण में, गायक अपने दिल की गहराई से कहते हैं, “खुशलब आँखे पत्थरा गई है” और “धड़कनो का भरोसा नही है”। उनके शब्द एक अत्यंत उदास और निराशाजनक अवस्था को बयान करते हैं, जहां वे मृत्यु के साथ जी रहे हैं, और उन्हें लब हिलाने की क्षमता भी नहीं है।

अंत में, गीतकार राधा से अपने दिल की बात कहते हैं, उनसे अपने चरणों में समाहित होने का अनुरोध करते हैं। “राधारानी बुला लो हमे भी” के शब्द इस भावनात्मक संवाद को और भी गहरा बनाते हैं, और गायक की असमर्थता और आत्महत्या की भावना को दर्शाते हैं।

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